(1) मरीचि के पुत्र कश्यप प्रजापति थे। ब्रह्मदेव की दाहिनी हाथ की बोटे की नली से दक्ष नाम का पुरुष और बाएँ हाथ की बोटे की नली से धरनी नाम की स्त्री जन्मीं। उन दोनों से एक हज़ार-हज़ार महा ऋषि जन्मे। (2) ब्रह्मा के मानस पुत्रों में दूसरे स्थान पर रहने वाले अंगिरस्‍ु को उद्दध्य, बृहस्पति और संवर्त जैसे पुत्र हुए। बृहस्पति देवताओं के आचार्य बने। (3) मैत्रि (अत्रि) नामक मानस पुत्र से अनेक महा मुनि जन्मे। (4) पुलस्त्य नामक ब्रह्मा के मानस पुत्र से राक्षसों का जन्म हुआ। (5) पुलह नामक मानस पुत्र से किन्नर और किमपुरुष वर्ग उत्पन्न हुए। (6) क्रतू नामक मानस पुत्र से पक्षियों की जाति उत्पन्न हुई।

   
    

Mahabharata - Drona Parva


॥ श्रीः ॥
7.34. अध्यायः 034
Mahabharata - Drona Parva - Chapter Topics
द्रोणेन पद्मव्यूहरचना॥ 1 ॥


Mahabharata - Drona Parva - Chapter Text

सञ्जय उवाच। 7-34-0x(4338)(46250)
स्थिरो भव महाराज शोकं धारय दुर्धरम्।
महान्तं बन्धुनाशं ते कथयिष्यामि तच्छृशु॥ 7-34-1(46251)
पद्मव्यूहो महाराज आचार्येणाभिकल्पितः।
तत्र पद्मोपमाः सर्वे राजानो विनिवेशिताः॥ 7-34-2(46252)
कुमारा राजलोकस्य निक्षिप्ताः केसरोपामाः।
कर्णिकास्थो महाराज तस्य दुर्योधनोऽभवत्॥ 7-34-3(46253)
कृताभिसमयाः सर्वे सुवर्णविकृतध्वजाः।
रक्ताम्बरधराः सर्वे सर्वे रक्तविभूषणाः॥ 7-34-4(46254)
सर्वे रक्तपताकाश्च सर्वे वै हेममालिनः।
चन्दनागुरुदिग्धाङ्गाः स्रग्विणः सूक्ष्मवाससः॥ 7-34-5(46255)
सहिताः पर्यधावन्त कार्ष्णि प्रतियुयुत्सवः।
तेषां दशसहस्राणि बभूवुर्दृढधन्विनाम्॥ 7-34-6(46256)
पौत्रं तव पुरस्कृत्य लक्ष्मणं प्रियदर्शनम्।
अन्योन्यसमदुःखास्ते अन्योन्यसमसाहसाः॥ 7-34-7(46257)
अन्योन्यं स्पर्धमानाश्च अन्योन्यस्य हिते रताः।
दुर्योधनस्तु राजेन्द्र सैन्यमध्ये व्यवस्थितः॥ 7-34-8(46258)
कर्णदुःशासनकृपैर्वृतो राजा महारथैः।
देवराजोपमः श्रीमाञ्श्वेतच्छत्राभिसंवृतः॥ 7-34-9(46259)
चामरव्यजनाक्षेपैरुदयन्निव भास्करः।
प्रमुखे तस्य सैन्यस्य द्रोणोऽवस्थित नायकः॥ 7-34-10(46260)
सिन्धुराजस्तथाऽतिष्ठच्छ्रीमान्मेरुरिवाचलः।
सिन्धुराजस्य पार्श्वस्था अश्वत्थामपुरोगमाः॥ 7-34-11(46261)
सुतास्तव महाराज त्रिंशत्त्रिदशसन्निभाः।
गान्धारराजः कितवः शल्यो भूरिश्रवास्तथा॥ 7-34-12(46262)
पार्श्वतः सिन्धुराजस्य व्यराजन्त महारथाः।
ततः प्रववृते युद्धं तुमुलं लोमहर्षणम्।
तावकानां परेषां च मृत्युं कृत्वा निवर्तनम्॥ ॥ 7-34-13(46263)

इति श्रीमन्महाभारते द्रोणपर्वणि अभिमन्युवधपर्वणि त्रयोदशदिवसयुद्धे चतुस्त्रिंशोऽध्यायः॥ 34 ॥

Mahabharata - Drona Parva - Chapter Footnotes

5-34-2 चक्रव्यूह इति झ.पाठः॥ 5-34-10 प्रमुखेऽग्रे। सैन्यस्य नायको द्रोणः। अवस्थितेतिच्छन्दोनुरोधाद्विसर्गलोपः॥ 5-34-34 चतुस्त्रिंशोऽध्यायः॥


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